नाना को श्रद्धांजलि
मकरंद बोले- सूखे से लड़ना ही नाना को सच्ची श्रद्धांजलि
फ़ाइल फ़ोटो: Wikimedia Commons (CC BY-SA 2.0 / CC BY 3.0)
डोणजे, पुणे
नाना के पार्थिव शरीर के पास सबसे पहले पहुंचने वालों में थे। परिवार को संभालते हुए खुद भी टूट गए।
मकरंद के शब्द
सूखे से जूझ रहे लोगों की और ज्यादा मदद करना ही नाना को सबसे अच्छी श्रद्धांजलि होगी।
2015 का सूखा
हर हफ्ते किसान आत्महत्या की खबरें आ रही थीं। तभी दो दोस्तों ने कुछ करने की ठानी।
फ़ाइल फ़ोटो: Suhasajgaonkar / Wikimedia Commons, CC BY-SA 4.0
सितंबर 2015
"ना" नाना से, "म" मकरंद से। मकसद: किसान परिवारों की मदद और पानी बचाने का काम।
ढोंडलगांव, वैजापुर
गांव वालों के श्रमदान से करीब 20 करोड़ लीटर पानी जमा करने की क्षमता बनी।
फ़ाइल फ़ोटो (प्रतीकात्मक): सुबोध कुलकर्णी / Wikimedia Commons, CC BY-SA 4.0
नतीजा
करीब 70% किसान अब दो फसल लेते हैं। रोज 10,000 लीटर तक दूध, करीब 800 युवाओं को काम।
गांव की आवाज
स्थानीय कार्यकर्ता राहुल साबले के मुताबिक काम के बाद गांव में कोई किसान आत्महत्या नहीं हुई।
आखिरी मुलाकात
निधन से कुछ महीने पहले भी नाना गांव गए थे और युवाओं को कारोबार के लिए प्रेरित किया।
फ़ाइल फ़ोटो: Sushrut.bhore / Wikimedia Commons, CC BY-SA 4.0
आगे क्या?
फाउंडेशन की टीम, बेटे मल्हार और मकरंद, सबने कहा है कि नाना का सपना अधूरा नहीं रहेगा।
पूरी खबर
मकरंद का बयान, ढोंडलगांव का बदलाव और नाना का अधूरा सपना, सब एक जगह पढ़ें।
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तस्वीरें: Wikimedia Commons (CC BY-SA / CC BY), फ़ाइल फ़ोटो।