वायरल बहस
फिर भी कुक क्यों नहीं हटातीं बेंगलुरु की मेघा?
प्रतीकात्मक तस्वीरें: Wikimedia Commons (CC BY 3.0 / पब्लिक डोमेन)
बेंगलुरु
मेघा ने X पर कुक के खर्च और खाने के स्वाद पर लिखा, और लोग दो खेमों में बंट गए।
फ़ाइल फ़ोटो: Saad Faruque / Wikimedia Commons, CC BY-SA 2.0
खर्च
दो लोगों का घर, दिन में दो बार कुक, रविवार छुट्टी। ये है बेंगलुरु का आम रेट, मेघा के मुताबिक।
कुक का रूटीन
मेघा का मजाक: प्रेशर कुकर ही इनका सबसे बड़ा हथियार है। दाल, आलू, चिकन, सब कुकर में।
प्रतीकात्मक: Ashish Bhatnagar / Wikimedia Commons, पब्लिक डोमेन
असली बात
हम रेस्टोरेंट जैसे खाने के लिए नहीं, दिन में दो बार "क्या बनाएं" सोचने से बचने के लिए पैसे देते हैं।
खेमा 1
एक यूजर: रात में 1 घंटा तैयारी और सुबह 30 मिनट काफी है। बिजी लोग हफ्ते भर का खाना पहले बना लें।
खेमा 2
सामान खरीदना, प्लानिंग, सब्जियां खराब होने से बचाना... काम तभी छोटा लगता है जब कोई और करे।
दूसरे शहर
सोशल मीडिया के दावे: चेन्नई में एक विजिट के 12-15 हजार। मुंबई में एक "महाराज" हर घर से 18 हजार।
हिसाब लगाइए
26 दिन, दिन में 2 बार। यानी एक बार का खाना बाहर की थाली से भी सस्ता।
टिप
कम तेल, कम मिर्च, हफ्ते का मेन्यू पहले से। "जैसा ठीक लगे" कहेंगे तो स्वाद भी ठीक-ठाक मिलेगा।
प्रतीकात्मक: Vipulgarhwali / Wikimedia Commons, CC BY-SA 4.0
पूरी खबर
पूरी बहस, शहरों के रेट और कुक रखने के 5 जरूरी टिप्स पढ़ें।
india.nexgenheadlines.com
तस्वीरें: Wikimedia Commons (CC BY / CC BY-SA / पब्लिक डोमेन), प्रतीकात्मक।