मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की विपक्ष की मांग के बीच भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष मुरली मनोहर जोशी का बयान चर्चा में है। जोशी ने कहा कि लोकतंत्र तभी बचेगा जब चुनाव निष्पक्ष हों, सरकारें जवाबदेह हों, नौकरशाही पारदर्शी हो और विपक्ष जिम्मेदार हो। उधर INDIA गठबंधन के नेता आज, शुक्रवार 9 अक्टूबर की रात 8 बजे राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मिलने वाले हैं। पढ़िए पूरा मामला।
मुख्य बातें
- जोशी का बयान (8 अक्टूबर): “जनता की, जनता के लिए और जनता द्वारा सरकार” तभी बचेगी जब चुनाव निष्पक्ष हों।
- संविधान पर जोर: संविधान का उल्लंघन हो तो सुप्रीम कोर्ट को देखना चाहिए।
- राष्ट्रपति से मुलाकात: INDIA गठबंधन का प्रतिनिधिमंडल आज रात 8 बजे राष्ट्रपति मुर्मू से मिलेगा।
- विपक्ष की मांग: CEC ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) में कथित गड़बड़ियों की जांच।
- चुनाव आयोग: उसके सभी आदेश “पूरी कानूनी मंजूरी” के साथ और तय प्रक्रिया के तहत जारी हुए।
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मुरली मनोहर जोशी ने क्या कहा
समाचार एजेंसी ANI के मुताबिक, गुरुवार 8 अक्टूबर को नई दिल्ली में पत्रकारों ने जोशी से CEC ज्ञानेश कुमार पर विपक्ष के सवालों और इस्तीफे की मांग के बारे में पूछा। जवाब में उन्होंने अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति अब्राहम लिंकन की लोकतंत्र की परिभाषा याद दिलाई।
“जनता की, जनता के लिए और जनता द्वारा चुनी गई सरकार धरती से खत्म नहीं होगी, बशर्ते चुनाव निष्पक्ष हों, सरकारें जवाबदेह हों, नौकरशाही पारदर्शी हो और विपक्ष संवेदनशील, जिम्मेदार हो और उसके पास एक साफ वैकल्पिक कार्यक्रम हो।”
मुरली मनोहर जोशी (ANI से बातचीत, हिंदी अनुवाद)
जोशी ने आगे कहा कि पूरी प्रक्रिया संविधान के दायरे में होनी चाहिए और अगर संविधान का उल्लंघन होता है तो सुप्रीम कोर्ट को इस पर गौर करना चाहिए। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र इसी सिद्धांत पर चलना चाहिए। उन्होंने किसी का नाम लेकर आरोप नहीं लगाया, लेकिन ऐसे समय में भाजपा के एक वरिष्ठतम नेता का “निष्पक्ष चुनाव” पर जोर देना सोशल मीडिया पर खूब चर्चा में है।
92 वर्षीय मुरली मनोहर जोशी भाजपा के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं और अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में मानव संसाधन विकास मंत्री रह चुके हैं।
INDIA गठबंधन आज रात राष्ट्रपति से मिलेगा
राष्ट्रपति भवन ने शुक्रवार सुबह विपक्षी नेताओं को रात 8 बजे का समय दिया। विपक्ष ने 2 अक्टूबर को मुलाकात का समय मांगा था। रिपोर्टों के मुताबिक, नेता पहले शाम 5 बजे संविधान सदन (पुराने संसद भवन) के सेंट्रल हॉल में जुटेंगे और फिर राष्ट्रपति भवन जाएंगे।
प्रतिनिधिमंडल में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, तृणमूल कांग्रेस की अध्यक्ष ममता बनर्जी, CPI(M) महासचिव एमए बेबी और RJD नेता तेजस्वी यादव के शामिल होने की बात कही गई है।

विपक्ष के आरोप क्या हैं
विपक्ष का आरोप है कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) में गड़बड़ियां हुई हैं और बड़े पैमाने पर नाम काटे गए हैं। विपक्षी नेता इसे “वोट चोरी” बता रहे हैं और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और CEC पर गंभीर आरोप लगा रहे हैं। राहुल गांधी ने कर्नाटक, महाराष्ट्र, हरियाणा और मध्य प्रदेश का जिक्र करते हुए कहा कि विपक्ष ने इन राज्यों के “सबूत” दिखाए हैं। ये आरोप राजनीतिक हैं और इनकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
राहुल गांधी ने कहा, “मामला गंभीर है। यह पिछले 10-15 साल का मामला है।” उन्होंने यह भी कहा कि यह चार-पांच दिन का नहीं, बल्कि लगातार चलने वाला विरोध है।
इस विवाद को उस खबर से भी हवा मिली जिसमें द इंडियन एक्सप्रेस ने बताया था कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 बार औपचारिक रूप से अपनी आपत्तियां दर्ज कीं, जिनमें ज्यादातर SIR से जुड़े फैसलों पर थीं। (ध्यान दें: चुनाव आयुक्त विवेक जोशी और भाजपा नेता मुरली मनोहर जोशी अलग-अलग व्यक्ति हैं।)
तीन दिन से दिल्ली में प्रदर्शन
विपक्षी सांसद लगातार तीन दिन से दिल्ली में प्रदर्शन कर रहे हैं और उनका कहना है कि CEC के इस्तीफे तक यह जारी रहेगा। प्रदर्शन के दौरान राहुल गांधी समेत कई नेताओं को पुलिस ने हिरासत में लिया। गुरुवार को INDIA गठबंधन के नेताओं ने राजघाट पर महात्मा गांधी की समाधि पर धरना दिया। पिछले हफ्ते गठबंधन ने SIR के खिलाफ अभियान तेज करने, रैलियां करने और “लोकतंत्र बचाओ” मार्च निकालने की योजना को मंजूरी दी थी।

चुनाव आयोग ने क्या कहा
चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों वाली खबर पर चुनाव आयोग ने कहा कि किसी भी संस्था के विचार-विमर्श में मतभेद और टिप्पणियां सामान्य बात हैं। आयोग के मुताबिक, उसके सभी आदेशों को “पूरी कानूनी मंजूरी” थी और वे तय वैधानिक प्रक्रिया के तहत जारी किए गए।
SIR क्या है?
विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision) मतदाता सूची को नए सिरे से जांचने की प्रक्रिया है। इसमें बूथ स्तर के अधिकारी (BLO) घर-घर जाकर मतदाताओं की जानकारी सत्यापित करते हैं, ताकि मृत, स्थानांतरित या दोहरे नाम हटाए जा सकें और छूटे हुए योग्य मतदाता जोड़े जा सकें। विपक्ष का कहना है कि इस प्रक्रिया में योग्य मतदाताओं के नाम भी कटे हैं, जबकि आयोग इसे सूची को साफ-सुथरा रखने की जरूरी कवायद बताता है।
| तारीख | क्या हुआ |
|---|---|
| 2 अक्टूबर | विपक्ष ने राष्ट्रपति से मुलाकात का समय मांगा |
| 7–9 अक्टूबर | दिल्ली में विपक्षी सांसदों का लगातार प्रदर्शन, कई नेता हिरासत में |
| 8 अक्टूबर | राजघाट पर धरना; मुरली मनोहर जोशी का “निष्पक्ष चुनाव” वाला बयान |
| 9 अक्टूबर, शाम 5 बजे | विपक्षी नेता संविधान सदन के सेंट्रल हॉल में जुटेंगे |
| 9 अक्टूबर, रात 8 बजे | INDIA गठबंधन की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात |
आगे क्या?
राष्ट्रपति से मुलाकात में विपक्ष CEC को हटाने और मतदाता सूची से नाम काटे जाने की गहन जांच की मांग औपचारिक रूप से रख सकता है। मुख्य चुनाव आयुक्त को उनके पद से हटाने की प्रक्रिया संविधान में सुप्रीम कोर्ट के जज को हटाने जैसी कठिन रखी गई है, यानी इसके लिए संसद के दोनों सदनों में विशेष बहुमत चाहिए। मुलाकात के बाद की जानकारी आने पर हम यह खबर अपडेट करेंगे।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
मुरली मनोहर जोशी ने चुनाव पर क्या कहा?
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र तभी बचेगा जब चुनाव निष्पक्ष हों, सरकारें जवाबदेह हों, नौकरशाही पारदर्शी हो और विपक्ष जिम्मेदार हो। संविधान का उल्लंघन होने पर सुप्रीम कोर्ट को दखल देना चाहिए।
INDIA गठबंधन राष्ट्रपति से कब मिलेगा?
शुक्रवार, 9 अक्टूबर 2026 को रात 8 बजे राष्ट्रपति भवन में।
विपक्ष CEC ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा क्यों मांग रहा है?
विपक्ष का आरोप है कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) में गड़बड़ियां हुईं और योग्य मतदाताओं के नाम काटे गए। चुनाव आयोग का कहना है कि उसके सभी आदेश कानूनी प्रक्रिया के तहत जारी हुए।
क्या मुख्य चुनाव आयुक्त को आसानी से हटाया जा सकता है?
नहीं। संविधान के अनुसार CEC को सुप्रीम कोर्ट के जज की तरह ही, संसद के दोनों सदनों में विशेष बहुमत से पारित प्रस्ताव के जरिए ही हटाया जा सकता है।
यह खबर ANI, नेशनल हेराल्ड, इंडिया टीवी और अन्य मीडिया रिपोर्टों पर आधारित है। अंग्रेज़ी में दिए गए बयानों का हिंदी अनुवाद किया गया है।


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